Thursday, December 17, 2020
रामायण के अरण्यकाण्ड के कुछ प्रेरणादायी दोहे
रामायण के अरण्यकाण्ड के कुछ प्रेरणादायी दोहे इस प्रकार है:
जनहि मोर बल निज बल ताही। दुहु कहँ काम क्रोध रिपु आही॥ यह बिचारि पंडित मोहि भजहीं। पाएहँ ग्यान भगति नहिं तजहीं॥
भावार्थ : मेरे भक्त को केवल मेरा ही बल रहता है और अपने आप को बलशाली व अक़्लमंद समझने वाले को अपना बल होता है। पर काम, क्रोध, (तनाव, भय) रूपी शत्रु तो दोनों के लिए हैं। भक्त के शत्रुओं को मारने की जिम्मेवारी मुझ पर रहती है, क्योंकि वह मेरे परायण (प्रेम में न्योछावर) होकर मुझे स्वामी मान कर मेरा ही बल मानता है, परन्तु अभिमान से भरे ज्ञानी जिन्हें अपने बल पर विश्वास होता है उनके शत्रुओं का नाश करने की जिम्मेवारी मुझ पर नहीं है। ऐसा भेद जानने वाले बुद्धिमान लोग अपने हृदय में हरदम मुझको ही भजते हैं। वे ज्ञान प्राप्त होने पर भी (किसी भी हालत में) भक्ति को नहीं छोड़ते।
करउँ सदा तिन्ह कै रखवारी। जिमि बालक राखइ महतारी। । । गह सिसु बच्छ अनल अहि धाई। तहँ राखइ जननी अरगाई॥
भावार्थ : परमात्मा कहते हैं: मैं सदा अपने प्रिय भक्तों की वैसे ही रखवाली करता हूँ, जैसे माता बालक की रक्षा करती है। छोटा बच्चा जब दौड़कर आग और साँप को पकड़ने जाता है, तो माता तुरंत आगे बड़ कर (अपने हाथ बड़ा कर) उसे बचा लेती है
प्रौढ़ भएँ तेहि सुत पर माता। प्रीति करइ नहिं पाछिलि बाता । । मोरें प्रौढ़ तनय सम ग्यानी। बालक सुत सम दास अमानी । ।
भावार्थ : सयाना हो जाने पर अपने पुत्र को माता प्रेम तो करती है , परन्तु पिछली बालक की अवस्था जैसी बात नहीं रहती अर्थात मात परायण शिशु की तरह वह फिर उसको बचाने की चिंता नहीं करती, क्योंकि वह अब माता पर निर्भर न रह कर अपनी रक्षा आप करने लगता है। श्री रामचन्द्र जी कहते हैं ज्ञानी मेरे प्रौढ़ (सयाने) पुत्र के समान है और नारद (तुम्हारे जैसा) अपने बल का मान न करने वाला सरल व वैरागी भक्त मेरे शिशु पुत्र के समान है।
Thursday, December 10, 2020
harer nāma harer nāma harer nāmaiva kevalam kalau nāsty eva nāsty eva nāsty eva gatir anyathā
harer nāmaiva kevalam
kalau nāsty eva nāsty eva
nāsty eva gatir anyathā
SYNONYMS
hareḥ nāma—the holy name of the Lord; hareḥ nāma—the holy name of the Lord; hareḥ nāma—the holy name of the Lord; eva—certainly; kevalam—only; kalau—in this Age of Kali; na asti—there is none; eva—certainly; na asti—there is none; eva—certainly; na asti—there is none; eva—certainly; gatiḥ—progress; anyathā—otherwise.
TRANSLATION
" 'For spiritual progress in this Age of Kali, there is no alternative, there is no alternative, there is no alternative to the holy name, the holy name, the holy name of the Lord.'
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